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भाजपा सरकार में बढ़े कोर्ट की अवमानना के मामले, अकबर ने राज्यपाल से किया ये आग्रह

रायपुर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्य की भाजपा सरकार के दौरान कोर्ट की अवमानना ( कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपनी इस चिंता से राज्यपाल रमेन डेका को भी अवगत कराया है। राज्यपाल को भेजे गए एक पत्र में श्री अकबर ने कहा- अवमानना के मामलों में वृद्धि यह संकेत देती है कि कई स्तरों पर न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया है कि राज्य शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने तथा न्यायालयीन आदेशों के प्रभावी अनुपालन नियमित समीक्षा एवं अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उचित कार्यवाही करेंगे। अवमानना प्रकरणों का आधिकारिक ब्योरा भी उन्होंने जारी किया है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बढ़ीं अवमानना याचिकाएं, चार साल में 87 प्रतिशत का उछाल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना से जुड़ी याचिकाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। हाईकोर्ट के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 1,010 अवमानना याचिकाएं दायर हुई थीं, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,884 तक पहुंच गई। यह चार वर्षों में करीब 87 प्रतिशत की वृद्धि है।

 

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2021 के बाद से अवमानना याचिकाओं का ग्राफ सामान्य तौर पर ऊपर की ओर रहा है। वर्ष 2022 में 1,279 मामले दर्ज हुए। इसके बाद 2023 में मामूली गिरावट आई और संख्या 1,185 पर पहुंच गई, लेकिन अगले दो वर्षों में फिर तेजी दर्ज की गई।

वर्ष 2024 में कुल 1,504 अवमानना याचिकाएं दायर हुईं, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,884 हो गई। यह 2016 से उपलब्ध आंकड़ों में किसी भी वर्ष का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2025 में दर्ज मामले 2021 की तुलना में 874 अधिक रहे।

 

2023 को छोड़ हर प्रमुख चरण में बढ़ोतरी

पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड में 2023 एकमात्र ऐसा वर्ष रहा, जब मामलों में साल-दर-साल कमी दर्ज हुई। 2022 के मुकाबले 94 कम याचिकाएं दायर हुईं। इसके बाद 2024 में 319 और 2025 में 380 मामलों की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई।

 

आंकड़े बताते हैं कि 2021 से 2025 के बीच अवमानना याचिकाओं में कुल वृद्धि केवल संख्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि वृद्धि की रफ्तार भी तेज हुई है।

 

2026 में क्या संकेत मिल रहे हैं?

14 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार वर्ष के पहले छह महीनों में 744 अवमानना याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। यह संख्या वर्ष के अंत तक और बढ़ेगी। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2025 का रिकॉर्ड टूटेगा या नहीं।

 

क्या होती है अवमानना याचिका?

अदालत की अवमानना से जुड़े मामले आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब किसी पक्ष द्वारा न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने, पालन में देरी करने या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया जाता है। ऐसे मामलों में प्रभावित पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाता है।

 

आंकड़ों में दिखता रुझान

वर्ष दायर अवमानना याचिकाएं

2021 1,010

2022 1,279

2023 1,185

2024 1,504

2025 1,884

2026* 744

14 जून 2026 तक की स्थिति में

 

इन आंकड़ों से यह साफ दिखाई देता है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिकाओं की संख्या लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। विशेष रूप से 2024 और 2025 में आई तेज बढ़ोतरी इस बात का संकेत देती है कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़े विवाद बड़ी संख्या में अदालत तक पहुंच रहे हैं। आंकड़े भले ही इसके कारणों की व्याख्या नहीं करते, लेकिन यह जरूर बताते हैं कि अवमानना याचिकाएं अब हाईकोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण श्रेणी के मामलों के रूप में उभर रही हैं।

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