
कवर्धा। कबीरधाम जिले के केसदा क्षेत्र से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां आदिवासी उद्यमी जगनी कामू बैगा ने महुआ को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्षों से शराब निर्माण से जुड़ी महुआ की छवि को बदलते हुए उन्होंने महुआ से पौष्टिक एवं स्वादिष्ट लड्डू तैयार कर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई शुरुआत की है।

जगनी कामू बैगा का कहना है कि महुआ केवल नशे का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने महुआ आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण का कार्य शुरू किया है। आने वाले समय में महुआ से कुकीज़, चिक्की, स्क्वैश सहित 30 से 40 प्रकार के उत्पाद तैयार करने की योजना है, जिससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
युवाओं को दिया आत्मनिर्भरता का संदेश
महुआ उत्पाद के शुभारंभ अवसर पर कामू बैगा ने युवाओं से नौकरी खोजने के बजाय स्वयं रोजगार सृजित करने का आह्वान किया। उन्होंने बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवसाय छोटा हो या बड़ा, शुरुआत करना जरूरी है। समाज को ऐसी सोच विकसित करनी चाहिए जिससे लोग नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बनें।
महुआ आदिवासी संस्कृति की पहचान
महुआ को आदिवासी समाज में ‘कल्पवृक्ष’ माना जाता है। यह उनकी संस्कृति, परंपरा और आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। महुआ के फूलों में विटामिन, आयरन, कैल्शियम और प्राकृतिक शर्करा प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जो इसे एक पौष्टिक खाद्य सामग्री बनाती है।
अब तक महुआ का उपयोग मुख्य रूप से पारंपरिक शराब निर्माण में होता रहा है, लेकिन इस नई पहल से इसकी पहचान एक ‘सुपरफूड’ के रूप में स्थापित होने की दिशा में कदम बढ़ा है। यह प्रयास आदिवासी समुदाय को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उनके पारंपरिक ज्ञान और वन संपदा को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।
महिला समूहों और युवाओं से जुड़ने की अपील
जगनी कामू बैगा ने जिले के आदिवासी युवाओं एवं महिला स्व-सहायता समूहों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की है। उनका मानना है कि महुआ के अमृत स्वरूप को पहचानकर आत्मनिर्भर भारत और सशक्त आदिवासी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।


