
कवर्धा। देश के करीब 15 से अधिक राज्य बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं, बाढ़ से प्रभावित लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपने बाल बच्चों के साथ अपना घरबार छोड़कर यहां वहां रहने और भटकने पर मजबूर हैं, पूरा देश कमर तोड़ महंगाई की मार झेल रहा है, देश का युवा रोजी रोजगार के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के डंडे खा रहा है, गांव, गरीब, किसान हर रोज अपने और अपने परिवार के लिए धरना प्रदर्शन कर अपना हक मांगते नजर आ रहा है, पड़ोसी भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में 30 आदिवासी बच्चों की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है कि वहां की सरकार उन्हें शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं करा पाई। लेकिन देशवासियों के इस दुख, दर्द व पीड़ा को नजर अंदाज करते हुए निर्माण व विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार में सिर से लेकर पांव तक डूबी भाजपा और उसकी सरकार देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर लोगों से अपने-अपने घरों में 17 सितंबर को दिया जलाने बोल रही है।

ऐसे में भाजपा बताए कि जो बाढ़ प्रभावित बेघरवार हो चुके हैं वे किसके दरवाजे में दिया जलाएं, भाजपा बताए कि मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के जिन 30 आदिवासी परिवारों के घर का चिराग बुझ गया है वे प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर कैसे दिया जलाएं, भाजपा बताए कि गरीबों को मिट्टी तेल मिल नहीं रहा है, खाद्य तेल दो सौ रुपए किलो हो चुका है वो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार दिया कैसे जलाएं, भाजपा बताए जो युवा रोजी, रोजगार के लिए घर से बाहर धरना प्रदर्शन कर रहा है उसके परिजन अपने घरों में भाजपा के आव्हान पर दिया कैसे जलाएं। कवर्धा कृषि उपज मण्डी के पूर्व उपाध्यक्ष चोवाराम साहू ने देश के मौजूदा हालातों में भाजपा के इस आव्हान पर तीखा हमला बोलते हुए इसे लोगों के जले पर नमक छिड़कना करार दिया है।


