कवर्धाछत्तीसगढ़न्यूज़भक्ति

कवर्धा राजमहल में परंपरागत धूमधाम से मनाया गया भोजली महोत्सव….

कवर्धा। हर वर्ष की भांति इस बार भी कवर्धा राजमहल में भोजली महोत्सव पारंपरिक रीति-रिवाज और बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। जिलेभर व आसपास के ग्रामों से आई महिलाओं तथा स्थानीय महिला मानस मंडली के बीच कवर्धा रियासत की महारानी एवं त्रिपुरा की सांसद रानी कृतिदेवी सिंह सोलह श्रृंगार कर विराजमान हुईं। स्थानीय कलाकारों ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी, वहीं सभा को संबोधित करने के बाद महारानी कृतिदेवी ने राजमहल व शहर में बोई गई भोजली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी बारिश और खुशहाली की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार व शंखनाद के बीच आरती के बाद भोजली विसर्जन जुलूस निकाला गया।

 

रक्षाबंधन के दूसरे दिन भाद्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाए जाने वाले इस पर्व में इस बार खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाएं और बच्चे अपने सिर पर भोजली की टोकरी लेकर भोजली तालाब पहुंचे। नागपंचमी के दिन मिट्टी में गेहूं बोने के बाद दस दिन तक ग्राम देवता की आराधना और देखभाल के साथ तैयार की गई भोजली का विधि-विधान से विसर्जन किया गया।

सेल्फी का रहा क्रेज

विसर्जन के दौरान महिलाएं, युवतियां और बच्चे अपने मोबाइल से लगातार सेल्फी लेते नजर आए। तालाब किनारे मित्रों और परिवार के साथ तस्वीरें खिंचवाने का उत्साह साफ झलक रहा था।

मित्रता और आशीर्वाद की परंपरा

भोजली विसर्जन के बाद एक-दूसरे के कान में भोजली खोंसकर ‘मितान’ या ‘गियां’ बनने की परंपरा निभाई गई। इसे छत्तीसगढ़ का ‘फ्रेंडशिप डे’ भी कहा जाता है। ग्रामीण अंचलों में भी यही परंपरा देखने को मिली, वहीं बड़े-बुजुर्गों को भोजली देकर आशीर्वाद लेने का संस्कार निभाया गया।

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