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ग्राम पंचायत भुरसीपकरी में पर्यावास अधिकार जागरूकता बैठक सम्पन्न, बैगा समुदाय ने सामूहिक रूप से आवाज उठाई

आज दिनांक 5 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत भुरसीपकरी में पर्यावास अधिकार जागरूकता अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में 25–30 ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें महिलाएँ, पुरुष एवं आदिवासी समता मंच की अध्यक्ष श्रीमती इंदु नेताम भी मौजूद रहीं।

बैठक में श्रीमती नेताम ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय आज भी सामुदायिक संसाधन अधिकार पत्र से वंचित है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार कानून बने कई वर्ष हो चुके हैं, मगर शासन-प्रशासन द्वारा बैगा आदिवासियों को सही तरह से जागरूक नहीं किया गया है।

 

उन्होंने यह भी बताया कि दलदली क्षेत्र के 28 गाँवों को सामुदायिक वन अधिकार पत्र तो दिया गया है, लेकिन वह प्रारूप अधिनियम (ख) में दिया गया है, जबकि ग्रामवासियों को नियम (ग) के अंतर्गत सामुदायिक संसाधन प्रबंधन का अधिकार मिलना आवश्यक है। इससे ग्रामीण अपने जंगलों के संरक्षण और प्रबंधन को बेहतर रूप से समझ सकते हैं।

 

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अब भी वन विभाग के कुछ कर्मचारी पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचा रहे हैं — कभी ‘कूप’ के नाम पर, कभी ‘बॉक्सड बांध’ के नाम पर, तो कभी ‘कान्हा–हाथी कॉरिडोर’ के नाम पर।

 

बैठक में उपस्थित प्रमुख लोग—

 

धर्म सिंह मछीया, अध्यक्ष, सियान हेबिटेट राइट्स, बोड़ला ब्लॉक

 

लमतू सिंह बगदरिया, पूर्व सरपंच एवं जनपद सदस्य

 

बुद्ध सिंह सुठकुरिया, वर्तमान सरपंच

 

बैगा समाज के प्रमुख बिहारी बैगा

 

विभिन्न गांवों के प्रतिनिधि — बंटी पथरा, सोना बाई, बैदलाल (पीपरखुटा), झल्लू बैगा (बाघमाड़ा), संमपत बैगा, दलसिंह बैगा आदि

 

 

सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि पूरे दलदली क्षेत्र का आदिवासी समुदाय एकजुट होकर जिला वन अधिकार समिति, कबीरधाम को पर्यावास अधिकार के लिए आवेदन प्रस्तुत करेगा।

साथ ही जल्द ही प्रत्येक ग्रामवासी संगठन होकर जिला कलेक्टर को मांग पत्र सौंपेंगे।

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