
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण व संगोष्ठि कर उनके द्वारा समाज के बीच किए गए उनके समर्पण को याद किया ।
अतिथि के रुप में सम्मिलित पीजी कॉलेज समाजशास्त्र विभाग के एचओडी मुकेश कामले ने उनको याद करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के एक ऐसे महान चिंतक, संविधान निर्माता और दलित समुदाय के लोकप्रिय नेता थे, जिन्होंने जीवनभर समाज से छुआछूत और जातिवादी मतभेदों को मिटाते हुए सभी के लिए समान अधिकारों की पैरवी की। उन्होंने न केवल भारतीय संविधान को आकार दिया, बल्कि समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय के खिलाफ भी सदैव प्रखरता से आवाज उठाई। आज भी उनका संघर्षशाली जीवन और उनके विचार हर भारतीय को प्रेरित करते हैं। उनके विचारों ने भारतीय जनमानस की चेतना जागकर, समाज को नई दिशा देने में मुख्य भूमिका निभाई। भारत में सभी के लिए एक समान अधिकारों और एकजुट भारत की नींव रखने में उनके विचारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया ।
एबीवीपी जिला संयोजक गजाधर वर्मा ने कहा कि बाबा साहेब सिर्फ एक नेता नहीं थे, वो उम्मीद थे उन करोड़ों लोगों के लिए जिन्हें समाज ने हाशिए पर धकेल दिया था। उन्होंने समाज के हर उस हिस्से के लिए लड़ाई लड़ी जिसे दुनिया ने अनदेखा कर दिया था। *”शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”*बाबा साहेब का यह नारा सामाजिक जागरूकता और अधिकारों की प्राप्ति का रास्ता दिखाता है। वे मानते थे कि शिक्षा से ही व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है, संगठन से ताकत मिलती है और अन्याय के खिलाफ संघर्ष जरूरी है। संविधान को केवल कानून की किताब समझना गलत है। यह आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने वाला मार्गदर्शक दस्तावेज़ है। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पीजी कॉलेज के प्रोफेसर्स, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य उदय तिवारी, कुंती साहू, अनिल यादव, युवराज ,पायल,हरीश प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।।
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