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एक ओर नोटिस, दूसरी ओर शिकायतों पर चुप्पी! जमीन विवाद को लेकर कुसुमघटा के ग्रामीणों ने उठाए सवाल, भाजपा नेताओं पर दबाव बनाने का आरोप

बोड़ला। ग्राम कुसुमघटा में जमीन से जुड़े नोटिस और कथित अतिक्रमण के मामलों को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के गरीबों, किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर जमीन अतिक्रमण का आरोप लगाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कुछ भाजपा नेताओं द्वारा अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा है।

इन्हीं मामलों को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं। ग्रामीणों के अनुसार, मुख्य रूप से दो मामलों को लेकर सवाल उठाए गए।

 

पहला मामला लेखाराम वर्मा एवं समस्त ग्रामवासियों की शिकायत से जुड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक, 5 दिसंबर 2024 को तहसील कार्यालय में 10 लोगों के खिलाफ कथित अतिक्रमण को लेकर शिकायत की गई थी। इस मामले में जांच भी की जा चुकी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अनावेदक आज तक किसी भी पेशी में उपस्थित नहीं हुए हैं। इसके बावजूद अब तक उचित कार्रवाई नहीं होने को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए।

 

दूसरा मामला गेंदलाल साहू की जमीन से संबंधित बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, गेंदलाल साहू की लगानी जमीन 34 डिसमिल है। इस मामले में तहसील स्तर पर मौका जांच की गई थी और ग्रामीणों का दावा है कि जांच के दौरान आवेदक की शिकायत को सही नहीं पाया गया। हालांकि, मौके पर तैयार पंचनामा अब तक आरआई और पटवारी द्वारा तहसील कार्यालय में जमा नहीं किए जाने की बात ग्रामीणों ने कही।

 

इसी संबंध में जानकारी लेने और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के लिए ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि नायब तहसीलदार से बातचीत के दौरान उन्हें कार्रवाई को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों ने बातचीत के दौरान राजनीतिक दबाव होने की आशंका भी जताई।

 

इसके बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर तहसील कार्यालय में ही धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। ग्रामीणों के अनुसार, नायब तहसीलदार ने पहले मामले में 10 लोगों के खिलाफ 16 अक्टूबर को बेदखली आदेश जारी करने की कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया।

 

वहीं, दूसरे मामले में एक सप्ताह के भीतर पंचनामा तहसील कार्यालय में जमा कराने के लिए लिखित आदेश जारी किए जाने की बात कही गई। अधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद समस्त ग्रामवासियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

 

ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए और गरीबों एवं किसानों की शिकायतों पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

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