
भगवान भोलेनाथ की भक्ति और मां नर्मदा के प्रति अटूट आस्था का अद्भुत उदाहरण श्री राज राजेश्वरी माता महाकाली डाक बम समिति के 25 डाक बम श्रद्धालुओं ने प्रस्तुत किया। समिति के डाक बमों ने अमरकंटक से नर्मदा जल लेकर पंचमुखी बुढ़ामहादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।

समिति के पहले वर्ष ही सभी डाक बम श्रद्धालु 06 अगस्त की रात 02 बजकर 19 मिनट पर अमरकंटक से नर्मदा जल लेकर रवाना हुए। कठिन और चुनौतीपूर्ण मार्ग को तय करते हुए लगातार दौड़ते हुए 07 अगस्त की रात करीब 10 बजे पंचमुखी बुढ़ामहादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने लगभग 44 घंटे के भीतर अपनी डाक बम यात्रा पूरी की।
घने जंगल, पथरीले रास्ते और उफनती नदियों को पार कर पूरी की यात्रा
समिति के सदस्य अमन ठाकुर ने बताया कि प्रथम वर्ष 25 डाक बम श्रद्धालुओं ने बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी यात्रा पूरी की। यात्रा के दौरान घने जंगल, पथरीले और दुर्गम रास्ते, चढ़ाई-उतराई तथा उफनती नदियों सहित अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन हर हर महादेव और नर्मदे हर के जयकारों ने सभी श्रद्धालुओं के भीतर नई ऊर्जा भर दी। डाक बमों ने पूरी यात्रा के दौरान बिना सोए लगातार अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए। थकान, दर्द और कठिन रास्तों के बावजूद किसी ने हार नहीं मानी। हर डाक बम के मन में केवल एक ही संकल्प था कि मां नर्मदा का पवित्र जल भगवान बुढ़ामहादेव के चरणों तक पहुंचाकर ही विश्राम करना है।

भक्ति, साहस और संकल्प का बना अद्भुत संगम
यह यात्रा केवल पैदल चलने या दौड़ने की यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, साहस और संकल्प की परीक्षा थी। रास्ते में आने वाली हर कठिनाई को श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की भक्ति के सामने छोटा माना। पंचमुखी बुढ़ामहादेव मंदिर पहुंचने पर सभी डाक बमों ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं जनकल्याण की कामना की। जलाभिषेक के बाद डाक बम श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान के साथ-साथ यात्रा पूरी होने की संतुष्टि और भक्ति का भाव साफ दिखाई दिया।
समिति के सदस्यों ने कहा कि डाक बम यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ और मां नर्मदा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। हर वर्ष इस यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह बढ़ता जा रहा है।


