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कबीरधाम जिले में डिजिटल भू-अभिलेखों में बड़ा खेल, बिना आदेश बदल दी गई जमीन की जानकारी

भुइँया पोर्टल में रकबा और भू-स्वामी के नाम में कथित बदलाव, तहसीलदार की रिपोर्ट में मामला उजागर

कबीरधाम जिले में डिजिटल राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के कवर्धा और बोड़ला राजस्व क्षेत्र में सामने आए मामलों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पड़ताल के दौरान ऐसे दस्तावेज और शिकायतें सामने आई हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि भुइँया पोर्टल में दर्ज भूमि के रकबे तथा भू-स्वामियों के नाम बिना किसी सक्षम राजस्व अधिकारी के आदेश के बदल दिए गए। जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में रिकॉर्ड में किए गए बदलाव सामने आने के बाद संबंधित प्रविष्टियों को दोबारा सुधार भी दिया गया। सबसे गंभीर मामला आदिवासी वर्ग की भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें बिना किसी वैधानिक आदेश के जमीन का नामांतरण कर उसे एक ओबीसी वर्ग के व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया। यह मामला तहसीलदार द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में उजागर हुआ है। इन घटनाओं ने डिजिटल भू-अभिलेखों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था तथा भुइँया पोर्टल के संचालन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वही राजस्व विभाग में चर्चा तेज है की बदलाव गलत थे तो किसने किए और यदि सही थे तो उन्हें वापस क्यों किया गया ।

केस – 1

 

ग्राम बरमांवर, प.ह.नं. 36, रा.नि.मं. राजानवागांव, तहसील बोड़ला, जिला कबीरधाम स्थित खसरा नंबर 29/7 (रकबा 0.607) में ऑनलाइन अभिलेख में स्वतः परिवर्तन होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, उक्त खसरा पर फौती नामांतरण आदेश दिनांक 06.06.2025 को पारित हुआ था। आदेश के पूर्व यह खसरा निवासी हरमो के नाम दर्ज था। लेकिन अक्टूबर माह में बी-1 प्रकाशन के दौरान यह खसरा के नाम पर दर्ज पाया गया, जबकि फौती नामांतरण के बाद इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया था। इसी प्रकार ग्राम रौचन, प.ह.नं. 35, रा.नि.मं. राजानवागांव, तहसील बोड़ला के खसरा नंबर 73/1 (रकबा 0.347/0.86) के रिकॉर्ड में भी विसंगति पाई गई है। पूर्व में यह खसरा के नाम दर्ज था तथा बंटवारा आदेश दिनांक 27.03.2024 के अनुसार दोनों खातेदारों के मध्य विभाजन किया गया था। किन्तु 08.10.2025 के निरीक्षण में पाया गया कि खसरा नंबर 73/1 में का नाम दर्ज है, जबकि अन्य खसरा नंबर 163/1, 304 आदि में आंशिक रूप से पुराने खातेदारों के नाम पुनः दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह 08.09.2025 से 30.09.2025 के बीच ऑनलाइन रिकॉर्ड में बिना किसी सक्षम आदेश के परिवर्तन होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह परिवर्तन न तो हल्का पटवारी के आईडी से और न ही तहसीलदार के अधिकृत आईडी से किया गया है, जिससे राजस्व अभिलेखों की प्रामाणिकता और डिजिटल प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

 

केस – 2

 

कबीरधाम जिले के छिरहा गांव में खसरा नंबर 21/4 के रकबे में बार-बार हुए बदलाव के बाद मामला अब केवल तकनीकी त्रुटि तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि रिकॉर्ड संशोधन प्रक्रिया की जांच की मांग उठने लगी है।10 मार्च को खसरा नंबर 21/4 का रकबा 0.128 हेक्टेयर से बढ़ाकर 0.228 हेक्टेयर दर्ज किया गया। इसके बाद शिकायत दर्ज होने पर 16 मार्च को इसे पुनः 0.128 हेक्टेयर कर दिया गया। इस उतार-चढ़ाव ने भू-अभिलेख प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यह बदलाव केवल तकनीकी त्रुटि नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे संभावित भूमि क्रय-विक्रय विवाद या आर्थिक लाभ की संभावना भी हो सकती है। भू-अभिलेख शाखा कवर्धा द्वारा आयुक्त, भू-अभिलेख (इंद्रावती भवन) को खसरा लाग रिपोर्ट के लिए पत्र भेजा गया है। वहीं, कलेक्टर कबीरधाम ने संबंधित पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

पटवारी संघ ने सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और कलेक्टर कबीरधाम , पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

पत्र में लिखा गया है की तहसीलदार बोडला द्वारा भी मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुचना ज्ञापन क्रमांक 1603 / वाचक – 1 / तह / 2025 बोडला दिनांक 15.10.2025 के माध्यम से जिला कलेक्टर (भूअभिलेख शाखा) जिला कबीरधाम को दिया गया । महोदय जी अभिलेख में हुए इस छेड़छाड़ की जानकारी लगभग 6 माह बीत जाने के उपरांत भी नही हो पाया, 6 माह बाद सूचना देने वाले हल्का पटवारी को ही कार्यालय कलेक्टर (भूअभिलेख शाखा) जिला कबीरधाम कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक 440/अ.भू.अ./स्था./2026 कवर्धा दिनांक 15.04.26 के माध्यम से जारी किया गया है, जिसमे किन कारणों से उक्त संशोधन / परिवर्तन किया गया है यह हल्का पटवारी से ही पूछा गया है । भुइयां सॉफ्टवेयर के पटवारी ID में ऐसा कोई भी विकल्प मौजूद नही है जिसके द्वारा बिना किसी आदेश के नाम परिवर्तन किया जा सके | बिना आदेश के एक मात्रा भी नही सुधारा जा सकता है । स्वतः ही अभिलेख परिवर्तन होना एक गंभीर मामला है | इसकी उच्च स्तरीय जाच किया जाना आवश्यक है ।

 

डिजिटल भू-अभिलेख में गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, कठोर कार्रवाई न होने पर जताई आशंका

 

प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिले में डिजिटल भू-अभिलेखों में हो रही गड़बड़ियां गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रकरण सामने आने के बावजूद विभाग द्वारा अब तक किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे मामले में मिलीभगत की आशंका और मजबूत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वनांचल क्षेत्रों कुई, कुकदूर, पोलमी, तरेगांव, चिल्पी, रेंगाखार और बोड़ला सहित कई इलाकों में बिना किसी वैध आदेश के भूमि रकबे में बदलाव के मामले सामने आ रहे हैं, जबकि विभाग इस पर मौन बना हुआ है।

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