
छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने प्रदेश में गो-वंश संरक्षण व संवर्धन एवं सांस्कृतिक आयोजनों के सन्दर्भ में विधानसभा में मुद्दा उठाया। इस दौरान उन्होंने गौशाला में गो-वंश के लिए चारा, पानी, शेड व मुलभुत सुविधाओं तथा उनके स्वास्थ्य व नियमित टीकाकरण के विषय और सांस्कृतिक योजनाओं में स्थानीय कलाकारों की सहभागिता को लेकर प्रश्न किया।

भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि राज्य में वर्तमान में पंजीकृत एवं अपंजीकृत गो-शालाओं की कुल संख्या कितनी है? गो-वंश संरक्षण एवं संवर्धन हेतु राज्य सरकार द्वारा कौन-कौन सी योजनाएँ संचालित किए जा रहे हैं तथा वर्ष 2024-25 में इसके लिए कितनी राशि आबंटित एवं व्यय की गई है? गो-शालाओं में चारा, पानी, पशु-चिकित्सा एवं टीकाकरण जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु क्या व्यवस्था की गई है? निराश्रित एवं सड़कों पर विचरण करने वाले गो-वंश की पहचान, पकड़ एवं संरक्षण के लिए क्या ठोस कार्ययोजना लागू की गई है? जिसके लिखित प्रतिउत्तर में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम जी ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 135 पंजीकृत एवं 54 अपंजीकृत, इस प्रकार कुल 189 गौशालाएं है। गौवंश संरक्षण हेतु छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग द्वारा गौशाला का पंजीयन तथा गौधाम योजनांतर्गत गौधाम का पंजीयन किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 135 पंजीकृत गौशालाओं को उनकी मांग अनुसार राशि रू. 1922.00 लाख अनुदान, आदर्श गौधाम एवं गोकुल ग्राम झालम, जिला बेमेतरा में संरक्षित पशुधन हेतु राशि रू. 29.75 लाख प्रदाय किया गया है एवं 11 पंजीकृत गौधामों को अद्यतन प्रदाय राशि निरंक है।

माननीय मंत्री जी ने बताया कि गो-वंश संवर्धन हेतु राज्य सरकार द्वारा पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, शत-प्रतिशत अनुदान पर सांड वितरण योजना एवं उन्नत मादा वत्सपालन योजना संचालित किए जा रहे हैं जिसके अंतर्गत वर्ष 2024-25 में पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम अंतर्गत 3 करोड़ 35 लाख 85 हजार से अधिक, शत-प्रतिशत अनुदान पर सांड वितरण योजना के तहत 80.50 लाख तथा उन्नत मादा वत्सपालन योजना के तहत 249.90 लाख रुपए आवंटित की गई। गौशालाओं में चारा, पानी, पशु चिकित्सा एवं टीकाकरण जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु छत्तीसगढ़ छ.ग. गौ सेवा आयोग क्रियान्वयन समिति की बैठक में अनुमोदन पश्चात् गौशालाओं को पोषण आहार, शेड निर्माण, पेयजल एवं अन्य मद में नियमानुसार अनुदान दिया जाता है। एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम राशि रू. 25.00 लाख प्रति संस्था प्रदाय किये जाने का प्रावधान है। निराश्रित एवं सड़कों पर विचरण करने वाले गौवंश की पहचान एवं पकड़ हेतु पशुओं में रेडियम पट्टी लगाया जाता है तथा गौवंशों के संरक्षण हेतु गौधाम योजना संचालित है।
भावना बोहरा ने सांस्कृतिक आयोजनों एवं स्थानीय कलाकारों के सहभागिता के सन्दर्भ में प्रश्न किया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभाग द्वारा आयोजित/प्रायोजित सांस्कृतिक आयोजनों की कुल संख्या कितनी है? उक्त आयोजनों पर मद-वार एवं जिलावार कुल कितना व्यय किया गया? उक्त आयोजनों में स्थानीय एवं लोक कलाकारों की सहभागिता का प्रतिशत कितना रहा? जिसके लिखित उत्तर में माननीय पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल जी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम की संख्या 2662, जिले द्वारा आयोजित कार्यक्रम की संख्या 52 तथा अशासकीय संस्थाओं द्वारा प्रायोजित सांस्कृतिक आयोजनों की संख्या 504 है। उक्त आयोजनों पर विभिन्न मांग संख्या अनुरूप 14,76,50,002 रु., 3,78,29,000 एवं 9,87,59,000 व्यय किया गया। विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में चिन्हारी पंजीकृत कलाकारों को स्वीकृति प्रदान की जाती है जिसमें 100 प्रतिशत स्थानीय कलाकारों की सहभागिता रहती है। जिला कलेक्टर तथा अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से आयोजित आयोजनों में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देते हुये कुल राशि का 45 प्रतिशत स्थानीय कलाकारों के भुगतान हेतु स्वीकृत किया जाता है।









