
छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत बजट को लेकर युवाओं, किसानों और आम जनता को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन रोजगार सृजन के मुद्दे पर बजट निराशाजनक साबित हुआ। युवाओं को बड़े पैमाने पर नौकरी देने की बात कही गई, परंतु न तो नई भर्तियों की स्पष्ट घोषणा की गई और न ही लंबित भर्तियों को पूरा करने की कोई ठोस समयसीमा तय की गई।

विशेष रूप से 56,000 शिक्षाकर्मियों की भर्ती का वादा अब तक अधूरा है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों में भारी निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है। युवा लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बजट में इस संबंध में कोई ठोस पहल नजर नहीं आई।
महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बजट में अपेक्षित संवेदनशीलता का अभाव दिखाई दिया। आम जनता को राहत देने वाले ठोस उपायों की कमी से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
युवाओं का कहना है कि सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर ठोस नीति और समयबद्ध कार्ययोजना के साथ रोजगार सृजन के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके और प्रदेश की विकास यात्रा को सही दिशा मिल सके।









