
वन अधिकार कानून 2006 लागू हुए 17 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी बोड़ला विकासखंड के बड़ी संख्या में पीवीटीजी बैगा समुदाय, आदिवासी तथा वन आश्रित परिवारों को उनके वैधानिक वन अधिकार प्राप्त नहीं हो सके हैं। प्रशासनिक उदासीनता और इच्छाशक्ति की कमी के कारण बोड़ला क्षेत्र में सैकड़ों पात्र व्यक्तियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र और लगभग 95% ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र अब तक नहीं मिल पाया है।

यह मुद्दा शुक्रवार को ग्राम गांगचुवा में आयोजित “वन अधिकार सम्मेलन” में प्रमुख रूप से सामने आया। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक संस्था आदिवासी समता मंच द्वारा किया गया था, जिसमें बोड़ला विकासखंड के 48 ग्रामों से आए प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अपने अनुभव साझा किए।
ग्रामीणों ने बताई अपनी समस्याएं
ग्राम सुकझर से आए धनीराम बैगा और लालू बैगा ने बताया कि उनके गांव के 12 बैगा परिवारों को अब तक व्यक्तिगत पट्टा नहीं मिला।

ग्राम खुरीपानी के प्रतिनिधियों ने बताया कि 25 परिवार पात्र होने के बावजूद आज भी वंचित हैं।
हड्डी, दरई, रबदा, बमनतरा, घटमुड़ा, बांटी, पथरापारा, लालमाटी, मो समेत कई गांवों में भी यही स्थिति है।

काबिज जमीन से कम मिले पट्टे
सम्मेलन में कई ग्रामीणों ने शिकायत की कि उन्हें उनकी वास्तविक काबिज जमीन से काफी कम क्षेत्र का पट्टा दिया गया है।
धुर सिंह ने बताया कि उनके 10 एकड़ काबिज जमीन में से सिर्फ 1 एकड़ का ही पट्टा बना।
रबदा के रतन सिंह ने कहा कि वे 2005 से पहले से 2 एकड़ जमीन पर काबिज थे, दावा लगाने के बाद भी पट्टा नहीं मिला।
झोला, बहरा, बमनतरा, मुकाम, आमाकोन्हा के प्रतिनिधियों ने भी इसी तरह की समस्याएं बताई।
सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से भी वंचित ग्राम सभाएं
आदिवासी समता मंच की अध्यक्ष इंदु नेताम ने कहा कि पूरे बोड़ला क्षेत्र में 95% ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र अब तक नहीं मिला है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के अम्बिकापुर, रायगढ़, कांकेर, धमतरी, जगदलपुर में बड़ी संख्या में ग्राम सभाओं को यह अधिकार मिल चुका है और वे वन प्रबंधन कार्य भी कर रहे हैं।
लेकिन कवर्धा जिले में महज 12 ग्राम इस अधिकार से लाभान्वित हो पाए हैं।
अधिकारियों से की अपील
इंदु नेताम ने जिला स्तरीय वनाधिकार समिति व दावा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से अपील की कि जिले में विशेष अभियान चलाकर—
सभी पात्र व्यक्तियों के व्यक्तिगत दावे
सभी ग्राम सभाओं के सामुदायिक दावे

का परीक्षण करके शीघ्र मंजूरी दी जाए, ताकि वंचित समुदायों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके।
🔹 कार्यक्रम में शामिल रहे
जयसवाल, दयाल सिंह मरावी, डॉ. राजेश रंजन, इतवारी पंदाद्राम सहित आदिवासी समता मंच के कई कार्यकर्ता सम्मेलन में उपस्थित रहे।
अध्यक्ष – इंदु नेताम
आदिवासी समता मंच, छत्तीसगढ़









