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बाल विवाह मुक्त कबीरधाम की ओर बड़ा कदम

जिले में जागरूकता की नई लहर, छात्र-छात्राओं ने ली सामूहिक शपथ

कबीरधाम: जिले में बाल विवाह रोकथाम को लेकर जागरूकता की एक मजबूत पहल शुरू हुई है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवड़न खुर्द में आयोजित विशेष कार्यक्रम में छात्रों ने बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक शपथ ली। छात्रों ने यह संकल्प लिया कि वे न तो स्वयं बाल विवाह करेंगे और न ही किसी भी रूप में ऐसी कुप्रथा को बढ़ावा देंगे। यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया।

  

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बाल विवाह के दुष्परिणाम, कानूनी प्रावधान और बच्चों के अधिकारों पर विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि बाल विवाह सिर्फ सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर अपराध है। शिक्षा को इसके समाधान का सबसे प्रभावी मार्ग बताया गया।

कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन

 

कार्यक्रम में खेमलाल खटर्जी (चाइल्ड राइट्स एसोसिएट – AVA), नीति आयोग आकांक्षी जिला/ब्लॉक विकास सहयोगी, तथा चाइल्ड हेल्पलाइन जिला कबीरधाम की सुश्री भारती घुर्वे उपस्थित रहे।

खेमलाल खटर्जी ने बताया कि भारत सरकार ने 27 नवंबर 2024 को बाल विवाह मुक्त भारत का राष्ट्रीय संकल्प लिया है, जिसके तहत देशभर में जागरूकता अभियान चल रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि बाल दिवस 14 नवंबर को जिले के सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में एक साथ बाल विवाह मुक्त जिला की शपथ दिलाकर इतिहास रचा गया।

 

कानून और सजा की जानकारी

 

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कानूनी प्रावधान समझाए गए—

 

लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु: 18 वर्ष

 

लड़कों की न्यूनतम विवाह आयु: 21 वर्ष

 

कम उम्र में विवाह कराना दंडनीय अपराध है।

यदि माता-पिता, अभिभावक, आयोजक, पंडित, मौलवी, टेंट हाउस या कोई भी व्यक्ति बाल विवाह संपन्न कराने में शामिल पाया जाता है, तो 1 लाख रुपये तक जुर्माना और 2 वर्ष की सजा का प्रावधान है।

 

ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका

 

कबीरधाम की अनेक ग्राम पंचायतों ने बाल विवाह मुक्त पंचायत बनने का प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामसभाओं में सामूहिक शपथ लेकर ग्रामीणों ने कुप्रथा खत्म करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

शिक्षा से ही बदलाव की शुरुआत

 

वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह पर रोक की शुरुआत घर, विद्यालय और ग्राम पंचायतों से होती है।

संदेश स्पष्ट था—

“शिक्षा ही समृद्धि का आधार है, और समृद्धि से ही सामाजिक बदलाव संभव है।”

 

कबीरधाम जिले द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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