
कवर्धा, छत्तीसगढ़: सारंगपुरकला स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र के व्याख्याता सी.पी. चंद्रवंशी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, बल्कि उनका समर्पण और सेवा भावना जिले के अधिकारियों से मिली प्रेरणा का परिणाम है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कबीरधाम (पूर्व में कवर्धा) जिले के अधिकारियों के कार्य और व्यवहार ने उन्हें सदैव उत्तम कार्य करने की दिशा में प्रेरित किया है।

चंद्रवंशी ने बताया कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडे जी ने उन्हें समझाया था कि यदि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता नहीं बढ़ाई गई, तो बच्चों की संख्या घटेगी और स्कूल बंद हो जाएंगे। यह बात उनके जीवन का मार्गदर्शक विचार बन गई। वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी वाय. डी. साहू और सहायक संचालक एम के गुप्ता का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनके बारे में सुनते आ रहे थे और गुप्ता सर के साथ काम करने का सौभाग्य भी मिला, जिससे उनके जीवन और कार्यशैली पर गहरा प्रभाव पड़ा।
उन्होंने सहायक संचालक यू. आर. चंद्राकर की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह कभी थकते नहीं हैं और उनकी समस्या का समाधान पलभर में कर देते हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर सतीश यदु को उन्होंने अपना गुरु बताया, जिन्होंने उन्हें घंटों तक कंप्यूटर सिखाया और यह सिखाया कि सरकारी काम केवल “सरकारी” नहीं, बल्कि “असरकारी” भी हो सकता है।
चंद्रवंशी ने जिले के प्रतिष्ठित अधिकारियों जैसे आर पी सिंह, आदित्य श्रीवास्तव, प्रमोद शुक्ला, आनंद शर्मा, डॉ. रमेश चंद्रवंशी आदि के विनम्र स्वभाव और प्रेरणादायक व्यवहार का भी उल्लेख किया। डॉ. रमेश चंद्रवंशी के छात्रों और शिक्षकों के प्रति समर्पण से वह अत्यधिक प्रेरित हैं।
वर्तमान में जिले में कार्यरत गणित शिक्षक नारायण तिवारी को उन्होंने अपना आदर्श बताया, जिनकी विषय प्रस्तुति इतनी प्रभावी होती थी कि विद्यार्थी कठिन विषय भी आसानी से समझ जाते थे। परीक्षा केंद्राध्यक्ष के रूप में स्वामी आत्मानंद स्कूल पोड़ी में परीक्षा लेते समय जिला शिक्षा अधिकारी वाय. डी. साहू और संयुक्त संचालक ठाकुर द्वारा दी गई सराहना ने उन्हें और अधिक निष्ठा से कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
विकासखंड बोड़ला के अधिकारियों बी पी चंद्राकर, शेखर राजपूत, एच के नायक, सोनी, केशरी, और आडिटर एस के निर्मलकर—के कार्यों और व्यवहार ने भी उन्हें अत्यधिक प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि इन सभी अधिकारियों ने यह सिखाया कि कठिन कार्य भी मनोबल और निष्ठा से सरल हो जाते हैं।
अवधेश नंदन श्रीवास्तव के मंच संचालन से उन्होंने यह सीखा कि सम्मान पाने के लिए पहले सम्मान देना आवश्यक है। अंत में उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिले के सभी अधिकारी उनकी प्रेरणा के स्रोत हैं और उनका प्रयास रहेगा कि वे भी उन्हीं की तरह ईमानदारी और समर्पण से कार्य करते रहें।









