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बजट: आम आदमी से धोखा, मित्रों को फायदा

युवा–किसान–मजदूर पूरी तरह उपेक्षित

प्रदेश सचिव पीसीसी वीरेंद्र सिंह जांगड़े ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पेश बजट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट देश के करोड़ों युवाओं, किसानों, मजदूरों और आम जनता की उम्मीदों पर सीधा कुठाराघात है। यह बजट गरीबों के लिए नहीं, बल्कि चुने हुए मित्र पूंजीपतियों के हितों को साधने का दस्तावेज़ है।

उन्होंने कहा कि आज देश का युवा रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहा है, लेकिन बजट में स्थायी नौकरियों के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे बुनियादी क्षेत्रों में आवंटन घटाया जा रहा है। भयावह बेरोज़गारी पर सरकार की चुप्पी उसकी असंवेदनशीलता और नाकामी को उजागर करती है।

 

जांगड़े ने कहा कि गरीब मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी और जीवन स्तर सुधार के नाम पर बजट पूरी तरह खोखला है। महंगाई से त्रस्त आम जनता को राहत देने के लिए सरकार के पास कोई कारगर योजना नहीं है। यह सरकार लगातार आम जनता को छलने का काम करती आई है, जबकि अपने चहेते मित्रों के लिए बजट के दरवाज़े पूरी तरह खुले रखे गए हैं।

 

किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के वादे एक बार फिर काग़ज़ों तक सीमित रह गए। फसलों के उचित दाम, MSP की गारंटी, कर्ज़ माफी, सिंचाई सुविधाएँ और खाद-बीज पर सब्सिडी जैसे अहम सवालों पर यह बजट कमज़ोर और दिशाहीन है।

 

उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट घटाया जाना यह साबित करता है कि सरकार गरीब, छात्र और मरीजों की परवाह नहीं करती। सरकार मूकदर्शक बनी बैठी है, जबकि देश की जनता महंगाई, बेरोज़गारी और बदहाल सेवाओं से जूझ रही है।

 

अंत में वीरेंद्र सिंह जांगड़े ने कहा कि यह बजट साफ तौर पर दिखाता है कि मोदी सरकार आम आदमी के लिए कोई नया विज़न नहीं लाई। यह बजट गरीबों को लाभ देने के बजाय देश की संपत्तियाँ बेचने और अपने मित्रों को फायदा पहुँचाने का माध्यम है। देश की जनता अब इस छलावे को समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका करारा जवाब देगी।

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