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छत्तीसगढ़ की संस्कृति के सम्मान में — ‘अरपा पैरी के धार’ को राज्यभर में गूंजाने की माँग

कवर्धा: छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना दिवस (1 नवंबर 2025) के अवसर पर प्रदेश के लोगों में सांस्कृतिक गर्व की भावना चरम पर है। इसी कड़ी में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर महोदय के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को ज्ञापन सौंपते हुए यह माँग की है कि आगामी 1 नवंबर को पूरे प्रदेश में राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ को अनिवार्य रूप से सभी सरकारी कार्यक्रमों, शालाओं और सार्वजनिक मंचों पर गाया जाए।

 

ज्ञापन सौंपने वालों का कहना है कि —

 

“यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि हमारी मातृभूमि, हमारी परंपरा और हमारी अस्मिता का उत्सव है। ‘अरपा पैरी के धार’ हमारे राज्य की आत्मा की धारा है, जो हर छत्तीसगढ़वासी के दिल में बहती है।”

 

 

साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने मौखिक रूप से कलेक्टर कार्यालय परिसर में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के रंग-रोगन की माँग भी रखी।

ज्ञापन सौंपने वालों में सुरेश साहू, राकेश निषाद, विकास चंद्रवंशी, कोमल साहू और विसर्जन यादव शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और राज्य गीत के सम्मान की लड़ाई शांतिपूर्ण और सांस्कृतिक रूप में जारी रहेगी।

कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि —

 

“यदि सरकार इस माँग पर ध्यान नहीं देती, तो हम शांतिपूर्ण सांस्कृतिक प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुँचाएँगे। छत्तीसगढ़ की संस्कृति को अनदेखा नहीं किया जा सकता।”

 

 

छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूरे होने पर यह पहल प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और आत्मसम्मान का प्रतीक बनती जा रही है।

आइए, इस 1 नवंबर को ‘अरपा पैरी के धार’ के साथ अपने गौरवशाली राज्य का उत्सव मनाएँ।

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